तेरे नाम पे क्यों लोग आज.. सांस हैं खोया ।

हिंदी दिवस के मौके पर मेरी ये कविता आप लोगो के सामने प्रस्तुत करते हुए मुझे बड़ी ख़ुशी महसुस हो रहा हैं ।हिंदी लिखने के लिए मुझें कठोर संग्राम करना पड़ा है, इसीलिए कुछ गलती हो तो नजरंदाज कीजिएगा।मेरी तरफ से आप सभी भारतीयों को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

“হিনদী দিবসর শুভ কামনা”

 

कहते हैं खुदा,

तूने हैं बनाया

ये धरती हरी-भरी ,

खुला ये

नीला-नीला आसमाँ।

ये पानी ;

ये हवा।

फिर क्यों हैं

ये लक़ीरे हर जहा।

 

धर्म की निर्मल जो धारा,

बना है आज प्रच्छ्न्द धारा,

जिसमें हैं डूबी ये सारा जहाँ ,

और बांटा सारा जहाँ।

कहाँ हैं रे खुदा

तू छुपा ,

क्यों न देता हमें

तेरा पता ।

अब तो तुझको हैं बांटा रे

ये दुनिया सारी।

तुझको बाटाँ है रे

ये दुनिया सारी ।

 

तेरी हैं ये धरती

हरा -भरा

खुला ये आसमाँ

पानी -हवा ।

जिसमे गूंजा करे

मुक्त स्वर ये मेरा ।

तूने हमें क्यों हैं बनाया।

तूने हमें क्यों हैं बनाया।

जिसने बांटा तुझे

और

तेरा ये जहाँ ।

क्यों न मुझे पंछी बनाया,

जो उड़ते मस्त गगन-गगन

मस्ती मैं होके हम मगन -मगन,

तैरकर ये तेरा मधुर हवा,

गाये वो गीत जो प्यार तेरा।

फिर ये सोच के

आज ये दिल जरा रोया।

तेरे नाम पे

क्यों लोग आज सांस हैं खोया ।

तेरी जमी पे

क्यों लक़ीरे हैं बनी ।

 

Please give a thought on these lines below……

 

तू भी मिट्टी

मैं भी मिट्टी

फिर क्यों हैं

हम हैं बांटा।

तेरा कुम्हार

मेरा कुम्हार

सबका तो एक ही कुम्हार

फिर क्यों हैं बांटा तुझें

ओ रे कुम्हार।

Leave a Reply