मोतियों सी बूंदे

ये जो मोतियों सी बूँदें हैं ,

जो आसमाँ से टपके हैं |

हमारी आरजुओं को मिलाती ,

ये  बारिशों कि बूंदे हैं |

बस तेरी याद दिलाती

ये  साज़िशों की बूँदे हैं |

इन बूंदो से मिलके मैं ,

तुमसे ही मिल जाता हूँ |

ये घुली-घुली सी सांसो में,

तेरी रौनकों की बूँदे हैं |

ये हवाएँ जो तेरे आँचल को छूके गुजरी हैं ,

जो तेरी साँसों से मेरी धड़कनों से गुजरी  हैं |

न चाँद-तारे ,न कोई परियों कि कहानी हैं |

अटूट धागे सी, तेरी मेरी नज़रों की रवानी है |

मेरी साँसे जिनमे तेरी खुस्बुएं पवन  सी चली हैं ,

इसमें बस तू और तेरी यादें खिली हैं |

ये लहराते से बादल तुझको ही छूकर गुजरे हैं ,

हर पल मुझको ताकती ये पागल सी नजरें हैं |

शहर कि भागदौड़ में , आगे आने क़ी होड़ में

ये बारिश ,ये आसमाँ,ये चाँद ,ये मोती;

आज भी  जीने  को कहते हैं |

ये तेरी-मेरी उम्मीदों क़ी

पलकों से पलकों क़ी बूंदे हैं |

जो आँखो से टपके ,

ये मोतियों सी बूंदे हैं ||

                                                                         20/03/2014

                                                                       बिटूपन दास

                                                                           (MrPi)

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