हिंदी

मोतियों सी बूंदे

ये जो मोतियों सी बूँदें हैं , जो आसमाँ से टपके हैं | हमारी आरजुओं को मिलाती , ये  बारिशों कि बूंदे हैं | बस तेरी याद दिलाती ये  साज़िशों की बूँदे हैं | इन बूंदो से मिलके मैं , तुमसे ही मिल जाता हूँ | ये घुली-घुली सी सांसो में, तेरी रौनकों की बूँदे हैं | ये हवाएँ जो तेरे आँचल को छूके गुजरी हैं , जो तेरी साँसों से मेरी धड़कनों से गुजरी  हैं | न चाँद-तारे ,न कोई परियों कि कहानी हैं | अटूट धागे सी, तेरी मेरी नज़रों की रवानी है | मेरी साँसे जिनमे तेरी…
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तेरे नाम पे क्यों लोग आज.. सांस हैं खोया ।

हिंदी दिवस के मौके पर मेरी ये कविता आप लोगो के सामने प्रस्तुत करते हुए मुझे बड़ी ख़ुशी महसुस हो रहा हैं ।हिंदी लिखने के लिए मुझें कठोर संग्राम करना पड़ा है, इसीलिए कुछ गलती हो तो नजरंदाज कीजिएगा।मेरी तरफ से आप सभी भारतीयों को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। “হিনদী দিবসর শুভ কামনা”   कहते हैं खुदा, तूने हैं बनाया ये धरती हरी-भरी , खुला ये नीला-नीला आसमाँ। ये पानी ; ये हवा। फिर क्यों हैं ये लक़ीरे हर जहा।   धर्म की निर्मल जो धारा, बना है आज प्रच्छ्न्द धारा, जिसमें हैं डूबी ये सारा जहाँ , और बांटा…
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